अगर आप पुरुष हैं-स्मार्ट फोन, लैपटॉप ज्यादा यूज करते हैं, तो हो जाएं अलर्ट...

मुख्य खबरे

अगर आप पुरुष हैं और लैपटॉप-स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो अब हो जाइए सावधान। इनके ज्यादा इस्तेमाल से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है और शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है

स्मार्ट फोन, लैपटॉप और वायरलैस कनेक्शन के असीमित उपयोग के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। रिसर्च में पता चला है कि इनसे निकलने वाले रेडिएशन से महिलाओं की अपेक्षा पुरुष ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पुरुषों की शुक्राणु जनन क्षमता कम हो रही है।

रिसर्च में यह भी पता चला है कि स्मार्ट उपकरणों और सेल्यूलर टॉवर से निकलने वाले विद्युत-चुंबकीय विकिरण की दर दूसरे देशों की तुलना में भारत में 10 गुना ज्यादा है। दंपतियों में प्रजनन से जुड़ी कई समस्याओं का कारण रेडिएशन को ही माना जा रहा है।  

पुरुषों में कम हो जाते हैं शुक्राणु

2014 में सेंट्रल यूरोपियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी के रिसर्च में पाया गया कि जिन पुरुषों ने अपने स्मार्ट फोन को लंबे समय तक पैंट के पॉकेट में रखा उनमें शुक्राणु की संख्या कम पाई गई। 2015 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी के रिसर्च में भी शुक्राणु की संख्या कम मिली।

शोध के दौरान महिला और पुरुष को एक घंटे तक मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन क्षेत्र में रखा गया। यह पाया गया कि तुलनात्मक रूप से पुरुष ज्यादा प्रभावित हुए। गर्भाशय के शरीर की गहराई में रहने के चलते महिलाओं की जनन क्षमता पर असर कम पड़ा। 

गर्भधारण करने में कठिनाई 

अमेरिका में ओहिया की क्लीवलैंड क्लीनिक फाउंडेशन ने स्मार्ट फोन और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले दंपतियों पर शोध किया। पाया गया कि 14 फीसद महिलाओं को गर्भधारण करने में कठिनाई हुई।

आप पुरुष हैं-स्मार्ट फोन, लैपटॉप ज्यादा यूज करते हैं, तो हो जाएं अलर्ट...

अगर आप पुरुष हैं और लैपटॉप-स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो अब हो जाइए सावधान। इनके ज्यादा इस्तेमाल से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है और शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है

स्मार्ट फोन, लैपटॉप और वायरलैस कनेक्शन के असीमित उपयोग के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। रिसर्च में पता चला है कि इनसे निकलने वाले रेडिएशन से महिलाओं की अपेक्षा पुरुष ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पुरुषों की शुक्राणु जनन क्षमता कम हो रही है।

रिसर्च में यह भी पता चला है कि स्मार्ट उपकरणों और सेल्यूलर टॉवर से निकलने वाले विद्युत-चुंबकीय विकिरण की दर दूसरे देशों की तुलना में भारत में 10 गुना ज्यादा है। दंपतियों में प्रजनन से जुड़ी कई समस्याओं का कारण रेडिएशन को ही माना जा रहा है।  

पुरुषों में कम हो जाते हैं शुक्राणु

2014 में सेंट्रल यूरोपियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी के रिसर्च में पाया गया कि जिन पुरुषों ने अपने स्मार्ट फोन को लंबे समय तक पैंट के पॉकेट में रखा उनमें शुक्राणु की संख्या कम पाई गई। 2015 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी के रिसर्च में भी शुक्राणु की संख्या कम मिली।

शोध के दौरान महिला और पुरुष को एक घंटे तक मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन क्षेत्र में रखा गया। यह पाया गया कि तुलनात्मक रूप से पुरुष ज्यादा प्रभावित हुए। गर्भाशय के शरीर की गहराई में रहने के चलते महिलाओं की जनन क्षमता पर असर कम पड़ा। 

गर्भधारण करने में कठिनाई 

अमेरिका में ओहिया की क्लीवलैंड क्लीनिक फाउंडेशन ने स्मार्ट फोन और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले दंपतियों पर शोध किया। पाया गया कि 14 फीसद महिलाओं को गर्भधारण करने में कठिनाई हुई।


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