रेणु देवी जो बनीं बिहार की डिप्टी सीएम, ऐसा रहा राजनीतिक सफर

राजनीति

बेतिया शहर के सुप्रिया रोड निवासी और बेतिया से भाजपा विधायक रेणु देवी ने राजनीतिक सफर दुर्गावाहिनी से शुरू किया। इंटरमीडिएट और बीए अंतिम वर्ष तक शिक्षा ग्रहण करने वाली नोनिया समाज की रेणु देवी की हिन्दी, अंग्रेजी, भोजपुरी और बंगला भाषा पर अच्छी पकड़ है। 01 नवंबर 1959 को जन्मी रेणु का बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव रहा है। 1981 में सामाजिक जीवन में पदार्पण हुआ। चंपारण और उत्तर बिहार को कार्यक्षेत्र बनाकर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हक की लड़ाई शुरू की। 1988 में भाजपा दुर्गावाहिनी की जिला संयोजक बनीं। उस दौरान राम मंदिर आंदोलन में करीब 500 महिला कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तारी दी। 1989 में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष चुनी गईं।  1990 में तिरहुत प्रमंडल में महिला मोर्चा की प्रभारी बनीं। 1991 में प्रदेश महिला मोर्चा की महामंत्री बनीं। 1992 में जम्मू कश्मीर तिरंगा यात्रा में शामिल हुई। 1993 भाजपा बिहार प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष चुनी गई। 1996 में फिर महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनीं। 2014 में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुनी गईं। पहली बार 1995 में नौतन विधान सभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी। 2000 में बेतिया विधान सभा सीट से चुनाव लड़ी और जीती। 2005 फरवरी व नवंबर में बेतिया से फिर विधायक बनीं। 2007 में बिहार की कला संस्कृति मंत्री बनीं। 2010 में भी विधायक बनीं। 2015 में कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी से चुनाव हार गई। 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर बेतिया से कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी को हरा दिया। रेणु देवी बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओं अभियान के तहत सदस्य के रूप में कार्य कर रही है। 


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